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मथुरा में साधु की मौत के बाद बवाल, हाईवे जाम और पथराव से बिगड़े हालात

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मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा में शनिवार को एक सड़क हादसे के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। ‘गौरक्षक बाबा’ और ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से पहचान रखने वाले चंद्रशेखर बाबा की मौत के बाद गुस्साए लोगों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। देखते ही देखते यह गुस्सा हिंसक प्रदर्शन में बदल गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने दिल्ली-मथुरा हाईवे को जाम कर दिया और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के एनकाउंटर की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। सड़क पर लंबा जाम लगने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया और सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार तड़के चंद्रशेखर बाबा अपने दो साथियों के साथ एक ट्रक का पीछा कर रहे थे। उन्हें संदेह था कि ट्रक में गौवंश ले जाया जा रहा है। इसी शक के आधार पर उन्होंने ट्रक को रोकने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि बाबा ने अपनी बाइक ट्रक के आगे खड़ी कर दी थी, ताकि वाहन को रोका जा सके।
इसी दौरान हादसा हो गया। आरोप है कि ट्रक चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी और बाबा को टक्कर मारते हुए मौके से फरार हो गया। इस टक्कर में बाबा गंभीर रूप से घायल हो गए और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। इस खबर के फैलते ही आसपास के लोग मौके पर जुटने लगे और देखते ही देखते बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा हो गई।
घटना से गुस्साए लोगों ने सड़क पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, स्थिति और बिगड़ती चली गई। पुलिस जब जाम हटाने और हालात को नियंत्रित करने पहुंची, तो प्रदर्शनकारियों ने उसका विरोध किया। कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
उपद्रवियों ने इस दौरान पुलिस की गाड़ियों को भी निशाना बनाया। करीब पांच से छह पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की गई और उनके शीशे तोड़ दिए गए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया। स्थानीय प्रशासन के लिए स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण बन गया। पुलिस बल की अतिरिक्त टुकड़ियां मौके पर भेजी गईं और पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
इधर, मामले को लेकर अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं। जहां एक ओर कुछ लोग इसे जानबूझकर किया गया हमला बता रहे हैं, वहीं पुलिस और प्रशासन की प्रारंभिक जांच इसे एक दुर्घटना मान रही है।
इस मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घटना की पूरी जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शैलेश पांडे ने घटना को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनके अनुसार, यह मामला किसी साजिश से जुड़ा नहीं बल्कि एक सड़क दुर्घटना है। उन्होंने बताया कि कोहरे के कारण दृश्यता कम थी और पीछे से आ रहे एक ट्रक ने पहले से खड़े ट्रक में टक्कर मार दी। इसी दौरान चंद्रशेखर बाबा उसकी चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
डीआईजी ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रकों में गौवंश होने की बात सही नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की और कहा कि जो लोग हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल थे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अफवाहों और अधूरी जानकारी के आधार पर भीड़ का उग्र हो जाना किस हद तक खतरनाक हो सकता है। एक ओर जहां एक साधु की मौत से लोगों में गुस्सा स्वाभाविक है, वहीं दूसरी ओर हिंसा और कानून हाथ में लेना स्थिति को और गंभीर बना देता है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
कुल मिलाकर मथुरा की यह घटना न केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को भी चुनौती दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन किस तरह से स्थिति को पूरी तरह सामान्य करता है।

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